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क्या ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त पद से हटाया जा सकता है

होम › राष्ट्रीय › राजनीति › चुनाव आयोग EXPLAINER अपडेटेड: 26 सितंबर 2026 | पढ़ने का समय: लगभग 7 मिनट ...

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EXPLAINER अपडेटेड: 26 सितंबर 2026 | पढ़ने का समय: लगभग 7 मिनट

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद तेज होने के बाद एक बड़ा सवाल सामने आया है—क्या भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके कार्यकाल के बीच पद से हटाया जा सकता है? इसका जवाब है: हाँ, लेकिन इसके लिए सामान्य सरकारी आदेश काफी नहीं है। संविधान ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए बेहद कठिन प्रक्रिया तय की है।

एक लाइन में जवाब:
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया जा सकता है, लेकिन उन्हें केवल उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी है।

ज्ञानेश कुमार कौन हैं?

ज्ञानेश कुमार भारत के वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त यानी Chief Election Commissioner (CEC) हैं। उन्होंने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। इससे पहले वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रह चुके हैं।

चुनाव आयोग भारत में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों से जुड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त आयोग के शीर्ष निर्णय लेने वाले अधिकारी होते हैं।

पद मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत
नाम ज्ञानेश कुमार
पदभार ग्रहण 19 फरवरी 2025
मुख्य संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 324(5)
हटाने का आधार सिद्ध दुराचार या अक्षमता

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग क्यों उठी?

सितंबर 2026 में चुनाव आयोग की मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हुआ। एक मीडिया जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।

इस रिपोर्ट के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग तेज कर दी। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने सहित कुछ प्रक्रियाओं में गंभीर सवाल पैदा हुए हैं।

महत्वपूर्ण: विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप अपने-आप में सिद्ध तथ्य नहीं हैं। किसी भी आरोप को संवैधानिक अर्थ में “सिद्ध दुराचार” मानने के लिए निर्धारित जांच और संसदीय प्रक्रिया जरूरी होगी।

चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?

चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा कि किसी संवैधानिक संस्था के भीतर अलग-अलग अधिकारियों द्वारा नोट, सवाल, सुझाव या अलग राय दर्ज करना सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार अंतिम संस्थागत फैसले निर्धारित प्रक्रिया से और तीनों आयुक्तों की मंजूरी के साथ लिए गए।

इसलिए वर्तमान विवाद में दो अलग पक्ष हैं—एक तरफ विपक्ष और मीडिया रिपोर्टों में उठाए गए सवाल हैं, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक चर्चा को अंतिम निर्णय से अलग करके देखा जाना चाहिए।

संविधान क्या कहता है?

भारत के संविधान का अनुच्छेद 324(5) मुख्य चुनाव आयुक्त को विशेष सुरक्षा देता है। इसके अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस तरीके से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(4) से जुड़ी है। इसमें दो मुख्य आधार हैं:

  • सिद्ध दुराचार (Proved Misbehaviour)
  • अक्षमता (Incapacity)

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से संबंधित 2023 का कानून भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए इसी संवैधानिक सुरक्षा को दोहराता है।

इसका आसान मतलब:
केंद्र सरकार या कोई मंत्री अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटा सकता। राष्ट्रपति भी सामान्य प्रशासनिक आदेश से उन्हें नहीं हटा सकते। पहले संसद में संविधान के अनुसार पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की पूरी प्रक्रिया

1. संसद में नोटिस दिया जाता है

हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सांसदों को आरोपों के साथ प्रस्ताव का नोटिस देना होता है। यदि प्रस्ताव लोकसभा में दिया जाता है तो कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर चाहिए। यदि राज्यसभा में दिया जाता है तो कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

2. स्पीकर या राज्यसभा के सभापति फैसला करते हैं

नोटिस मिलने के बाद संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी यह तय करते हैं कि प्रस्ताव स्वीकार किया जाए या नहीं। केवल आवश्यक संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर होने से मुख्य चुनाव आयुक्त अपने-आप पद से नहीं हटते।

3. आरोपों की जांच होती है

प्रस्ताव स्वीकार होने पर आरोपों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समिति बनाई जाती है। जांच का उद्देश्य यह देखना होता है कि लगाए गए आरोप वास्तव में सिद्ध होते हैं या नहीं।

4. दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी

यदि मामला हटाने की संसदीय प्रक्रिया तक पहुंचता है तो लोकसभा और राज्यसभा—दोनों में प्रस्ताव को बहुत बड़े बहुमत से पारित करना होता है।

  • सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत, और
  • उस दिन उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में कम से कम दो-तिहाई समर्थन।

संविधान के अनुसार दोनों सदनों द्वारा हटाने का संबोधन एक ही संसदीय सत्र में राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत किया जाता है।

5. राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं

संसद की आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का औपचारिक आदेश जारी करते हैं।

सांसदों का नोटिस → प्रस्ताव स्वीकार → जांच → लोकसभा में विशेष बहुमत → राज्यसभा में विशेष बहुमत → राष्ट्रपति का आदेश

क्या इसे “महाभियोग” कहना सही है?

समाचारों और राजनीतिक चर्चा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव के लिए अक्सर “महाभियोग” शब्द इस्तेमाल किया जाता है। तकनीकी रूप से संविधान मुख्य चुनाव आयुक्त के मामले में removal यानी पद से हटाने की प्रक्रिया बताता है। फिर भी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने वाली व्यवस्था के समान होने के कारण मीडिया में इसे आम तौर पर impeachment motion भी कहा जाता है।

क्या सिर्फ विपक्ष की मांग से ज्ञानेश कुमार हट जाएंगे?

नहीं। किसी राजनीतिक दल की मांग, प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस या मीडिया रिपोर्ट से मुख्य चुनाव आयुक्त अपने-आप पद से नहीं हटते। हटाने के लिए संविधान में तय पूरी संसदीय प्रक्रिया और जरूरी बहुमत पूरा होना आवश्यक है।

इसी तरह यह भी अभी तय नहीं माना जा सकता कि मौजूदा आरोप “सिद्ध दुराचार” की संवैधानिक सीमा को पूरा करते हैं। इसका निर्धारण जांच और संवैधानिक प्रक्रिया में ही हो सकता है।

क्या इससे पहले किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया गया है?

भारत में अब तक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए पद से हटाया नहीं गया है। इसलिए यह प्रक्रिया भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में बेहद असाधारण मानी जाती है।

अभी ज्ञानेश कुमार के मामले की स्थिति क्या है?

सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह तक विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। 23 से 25 सितंबर के बीच इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सार्वजनिक रूप से इस्तीफे और हटाने की मांग तेज की तथा विरोध प्रदर्शन भी हुए।

इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हटाने की मांग और वास्तव में पद से हटाया जाना दो अलग बातें हैं। जब तक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहते हैं।

आम नागरिक के लिए यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

चुनाव आयोग भारत की चुनावी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है। मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम, चुनाव आचार संहिता और चुनाव प्रक्रिया में आयोग की भूमिका सीधे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ी होती है।

इसी कारण संविधान ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक तरफ मजबूत सुरक्षा दी है ताकि सरकार उन्हें आसानी से न हटा सके, और दूसरी तरफ गंभीर मामलों में संसद को निर्धारित प्रक्रिया से उन्हें हटाने का अधिकार भी दिया है।

निष्कर्ष

ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाना कानूनी रूप से संभव है, लेकिन यह सामान्य बर्खास्तगी नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी सुरक्षा प्राप्त है। किसी भी हटाने की प्रक्रिया में आरोपों की जांच, संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत और अंत में राष्ट्रपति का आदेश जरूरी है।

मौजूदा राजनीतिक विवाद में विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने कहा है कि आंतरिक मतभेद और टिप्पणियां संस्थागत चर्चा का सामान्य हिस्सा थीं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इसलिए वर्तमान स्थिति को आरोप, आयोग के जवाब और संवैधानिक प्रक्रिया—तीनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या प्रधानमंत्री मुख्य चुनाव आयुक्त को सीधे हटा सकते हैं?

नहीं। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान में तय संसदीय प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

2. क्या राष्ट्रपति सीधे ज्ञानेश कुमार को पद से हटा सकते हैं?

सामान्य आदेश से नहीं। राष्ट्रपति का हटाने का आदेश संसद की आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आता है।

3. प्रस्ताव शुरू करने के लिए कितने सांसद चाहिए?

लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर से नोटिस शुरू किया जा सकता है।

4. क्या प्रस्ताव आते ही CEC पद से हट जाते हैं?

नहीं। प्रस्ताव स्वीकार होना, जांच और फिर दोनों सदनों में जरूरी विशेष बहुमत मिलना आवश्यक है।

5. क्या किसी CEC को भारत में पहले हटाया गया है?

नहीं। अब तक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस प्रक्रिया से पद से नहीं हटाया गया है।

6. क्या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध हो चुके हैं?

नहीं। राजनीतिक आरोप और मीडिया रिपोर्टें सामने आई हैं, लेकिन उन्हें संवैधानिक अर्थ में “सिद्ध दुराचार” मान लेना उचित नहीं होगा। इसका निर्धारण तय जांच और संसदीय प्रक्रिया से होगा।

मुख्य स्रोत:
  • भारत का संविधान — अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4)
  • Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023
  • Election Commission of India — आधिकारिक प्रोफाइल और वक्तव्य
  • The Indian Express — 23 से 25 सितंबर 2026 की रिपोर्ट और संवैधानिक Explainer
  • India Today / PTI आधारित रिपोर्ट — चुनाव आयोग का जवाब और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध संवैधानिक प्रावधानों, आधिकारिक जानकारी और प्रकाशित समाचार रिपोर्टों पर आधारित एक तथ्यात्मक Explainer है। इसमें उल्लेखित राजनीतिक आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं और उन्हें न्यायिक या संसदीय रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है। खबर की स्थिति बदलने पर लेख को अपडेट किया जा सकता है।
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Tags: Gyanesh Kumar, Chief Election Commissioner, Election Commission of India, Article 324, CEC Removal, Parliament, Constitution of India, SIR
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