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गांधी जयंती 2 अक्टूबर को ही क्यों मनाई जाती है? जानिए इस दिन की पूरी कहानी

गांधी जयंती 2 अक्टूबर को क्यों मनाई जाती है? जानिए गांधीजी का जन्म, स्वतंत्रता संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस की कहानी आसान हिंदी में।

हर साल 2 अक्टूबर को देश महात्मा गांधी को याद करता है। स्कूलों में उनके जीवन पर कार्यक्रम होते हैं और लोग उनके सत्य व अहिंसा के विचारों पर चर्चा करते हैं। लेकिन गांधी जयंती के लिए यही तारीख क्यों चुना गया ?

इसका सीधा जवाब है—महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके जन्मदिन की याद में हर साल इसी तारीख को गांधी जयंती मनाई जाती है। 2 अक्टूबर 2026 को उनकी 157वीं जयंती है।

 स्रोत: गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति

पोरबंदर के मोहनदास से महात्मा गांधी तक

गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिता करमचंद गांधी और माता पुतलीबाई थीं। आगे चलकर उन्होंने कानून की पढ़ाई की और वकालत शुरू की। लेकिन उनके जीवन का रास्ता दक्षिण अफ्रीका में मिले अनुभवों से बदलने लगा। स्रोत: गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति

वर्ष 1893 में वे एक कानूनी मामले के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। 7 जून 1893 को पीटरमैरिट्जबर्ग में उन्हें ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे से उतार दिया गया। इस अपमान ने उन्हें भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने की दिशा में आगे बढ़ाया। स्रोत: दक्षिण अफ्रीका में भारतीय उच्चायोग

दक्षिण अफ्रीका में ही उनके सत्याग्रह के प्रयोग विकसित हुए। 1906 में उन्होंने वहाँ एक भेदभावपूर्ण प्रस्तावित कानून के विरोध में सत्याग्रह अभियान शुरू किया। सरल भाषा में सत्याग्रह का मतलब है—सच्चाई पर टिके रहकर, हिंसा किए बिना अन्याय का विरोध करना। स्रोत: गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति

भारत की आज़ादी की लड़ाई में क्या भूमिका रही?

गांधीजी 9 जनवरी 1915 को भारत लौटे। इसके बाद उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम लोगों के सवालों को उठाया। 1917 का चंपारण सत्याग्रह और 1918 के खेड़ा तथा अहमदाबाद के संघर्ष उनकी शुरुआती महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल थे। स्रोत: राजघाट समाधि समिति

असहयोग आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग छोड़ने का रास्ता दिखाया। 1930 में गांधीजी ने दांडी यात्रा की और 6 अप्रैल को नमक कानून तोड़ा। रोजमर्रा की जरूरत के नमक को आंदोलन का मुद्दा बनाकर उन्होंने आम लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा। स्रोत: राजघाट समाधि समिति

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी उनका प्रमुख नेतृत्व था। स्वतंत्रता संघर्ष अनेक नेताओं, क्रांतिकारियों और अनगिनत नागरिकों के योगदान से आगे बढ़ा; गांधीजी ने इसमें सत्याग्रह और अहिंसा को व्यापक जनभागीदारी का माध्यम बनाया। स्रोत: गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति

जन्मदिन को राष्ट्रीय महत्व क्यों मिला?

गांधी जयंती उनके जन्म के साथ देश और दुनिया के प्रति उनके योगदान को याद करने का अवसर है। शांति, न्याय और समानता के उनके संदेश के सम्मान में भारत में 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश रहता है। राजघाट पर श्रद्धांजलि और अन्य स्थानों पर प्रार्थना व स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्रोत: भारत सरकार का पर्यटन पोर्टल

इसकी तारीख हर साल इसलिए समान रहती है क्योंकि यह उनके जन्म की निश्चित तारीख से जुड़ी है। गांधी जयंती मनाने का उद्देश्य उनके जीवन से सीख लेना और अपने व्यवहार में सच्चाई, सादगी तथा दूसरों के प्रति सम्मान को जगह देना भी है।

दुनिया भी 2 अक्टूबर को क्यों याद करती है?

गांधीजी के अहिंसा के संदेश को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून 2007 को एक प्रस्ताव अपनाकर 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। इस दिन का उद्देश्य शिक्षा और जनजागरूकता के जरिए अहिंसा का संदेश फैलाना है। इसके लिए गांधीजी की जन्मतिथि चुनी गई। स्रोत: संयुक्त राष्ट्र

अहिंसा का संदेश रोजमर्रा की जिंदगी में भी अपनाया जा सकता है। मतभेद होने पर बातचीत करना, गुस्से में किसी को नुकसान न पहुँचाना और अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना इसके व्यावहारिक उदाहरण हैं।

गांधी जयंती और पुण्यतिथि में अंतर

गांधीजी की जयंती 2 अक्टूबर को होती है। उनकी हत्या 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला हाउस में हुई थी, इसलिए उनकी पुण्यतिथि 30 जनवरी को आती है। जन्मदिन और पुण्यतिथि दो अलग अवसर हैं। स्रोत: गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति

2 अक्टूबर एक और कारण से खास है। इसी दिन 1904 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था। इसलिए देश इस तारीख को शास्त्रीजी की जयंती भी मनाता है। स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय

गांधी जयंती हमें एक सवाल पर सोचने का अवसर देती है—हम अपने घर, समाज और देश में सच्चाई, शांति और समानता के लिए क्या कर सकते हैं? उनके जन्मदिन को याद करने का अर्थ उनके विचारों को समझना और जीवन में अपनाने की कोशिश करना भी है।

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