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ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट में किस फैसले और किस प्रक्रिया पर होगी अगले सप्‍ताह सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार और SIR से जुड़े फैसलों की प्रक्रिया पर सुनवाई होगी। जानें पूरा विवाद आसान भाषा में।

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सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानेश कुमार से जुड़ा मामला क्या है?

मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहुंची है।

29 सितंबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले को जल्द सुनने की मांग की गई। अदालत ने इसे अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की बात कही है। हालांकि सुनवाई की निश्चित तारीख आधिकारिक Cause List में आने के बाद ही साफ होगी।

यहां सबसे पहले एक बात समझना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अभी ज्ञानेश कुमार को उनके पद से नहीं हटाया है। उन्हें निलंबित भी नहीं किया गया है और SIR को रद्द करने का भी कोई नया आदेश नहीं दिया गया है।

अभी मामला केवल सुनवाई के चरण में पहुंच रहा है।

आखिर विवाद क्या है?

इस पूरे मामले का सबसे आसान मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल उठाया गया है कि चुनाव आयोग द्वारा SIR को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण फैसले क्या वास्तव में चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए थे या नहीं।

इस समय चुनाव आयोग में तीन सदस्य हैं:

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
  • चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू
  • चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी

याचिका में सवाल उठाया गया है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में क्या तीनों सदस्यों की राय ली गई थी, या कुछ फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए।

यानी आसान भाषा में कहें तो सुप्रीम कोर्ट के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं है कि SIR सही है या गलत, बल्कि यह भी सवाल है कि SIR से जुड़े फैसले लेने की कानूनी प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई गई या नहीं।

याचिका किसने दाखिल की है?

यह याचिका राकेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल की गई है।

याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में लाई गई है।

याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग रखी।

याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि संविधान के अनुच्छेद 324 में चुनाव कराने और मतदाता सूची जैसे चुनावी मामलों की जिम्मेदारी Election Commission of India को दी गई है।

यानी यह शक्ति केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत शक्ति नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग नाम की पूरी संवैधानिक संस्था को दी गई है।

अनुच्छेद 324 को आसान भाषा में समझिए

भारत के संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान है।

इसके तहत संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को दी गई है।

याचिका में इसी आधार पर कहा गया है कि जब चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दूसरे चुनाव आयुक्त भी मौजूद हैं, तो महत्वपूर्ण फैसले आयोग की तय प्रक्रिया के अनुसार होने चाहिए।

चुनाव आयोग में फैसला कैसे होता है?

इस मामले को समझने के लिए Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 भी महत्वपूर्ण है।

इस कानून की धारा 18 में चुनाव आयोग के काम करने और फैसले लेने की प्रक्रिया का प्रावधान है।

आसान भाषा में इसका मतलब है कि चुनाव आयोग कोशिश करेगा कि फैसले सभी सदस्यों की सहमति से हों।

लेकिन यदि किसी मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद हो जाए, तो फैसला बहुमत से किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर तीन सदस्यों में से दो सदस्य किसी फैसले के पक्ष में हैं और एक सदस्य उसके खिलाफ है, तो दो सदस्यों की राय बहुमत मानी जा सकती है।

अब याचिका में सवाल यही उठाया गया है कि SIR से जुड़े विवादित फैसलों में इस कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

किन फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं?

मामला केवल किसी एक आदेश से जुड़ा नहीं है।

याचिका में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कई फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

इनमें मुख्य रूप से:

  • Special Intensive Revision यानी SIR लागू करने से जुड़े फैसले
  • नए मतदाताओं के Form 6 से जुड़े बदलाव
  • मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड
  • मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े फैसले
  • चुनाव आयोग के नाम से जारी कुछ आदेश और निर्देश

जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

हालांकि यहां यह साफ रखना जरूरी है कि याचिका में सवाल उठाया जाना और किसी आरोप का अदालत में साबित हो जाना दो अलग बातें हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन आरोपों को सही नहीं माना है।

Form 6 क्या है?

Form 6 का इस्तेमाल नया मतदाता बनने के लिए किया जाता है।

अगर किसी व्यक्ति की उम्र 18 साल हो चुकी है या वह चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार मतदाता बनने योग्य है और उसका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो वह Form 6 के जरिए अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है।

चुनाव आयोग के आधिकारिक Voters' Service Portal पर भी Form 6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए उपलब्ध है।

SIR से जुड़ी याचिका में Form 6 की प्रक्रिया में किए गए कुछ बदलावों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

लेकिन इन सवालों की कानूनी सच्चाई अदालत में संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।

याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट से क्या चाहता है?

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कई मांगें की हैं।

सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि अदालत साफ करे कि चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कानून के अनुसार आयोग की सामूहिक प्रक्रिया से होना चाहिए।

याचिकाकर्ता यह भी चाहता है कि अदालत जरूरत पड़ने पर चुनाव आयोग से उन फैसलों से जुड़े मूल दस्तावेज मंगाए।

इनमें उदाहरण के तौर पर:

  • बैठक के रिकॉर्ड
  • फाइल नोटिंग
  • फैसलों की मंजूरी से जुड़े रिकॉर्ड
  • आधिकारिक आदेश
  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड

शामिल हो सकते हैं।

इन दस्तावेजों से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी फैसले को तीनों सदस्यों की सहमति मिली थी, बहुमत से फैसला हुआ था या प्रक्रिया कुछ और थी।

क्या ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की गई है?

याचिका में सुनवाई के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद पर काम करने से रोकने जैसी अंतरिम राहत की मांग भी बताई गई है।

लेकिन यहां बहुत सावधानी से समझना जरूरी है कि यह केवल याचिकाकर्ता की मांग है।

इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को हटाने या निलंबित करने का आदेश दे दिया है।

अदालत ऐसी मांग को स्वीकार भी कर सकती है, अस्वीकार भी कर सकती है या उस पर बाद में विचार कर सकती है।

क्या पूरे SIR को रद्द करने की मांग है?

याचिका का तर्क है कि अगर यह साबित होता है कि SIR से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले कानून के अनुसार चुनाव आयोग की सामूहिक प्रक्रिया से नहीं लिए गए, तो उन फैसलों की वैधता पर सवाल उठ सकता है।

इसी आधार पर SIR से संबंधित फैसलों को रद्द करने की मांग भी की गई है।

लेकिन इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है।

अभी यह कहना गलत होगा कि SIR रद्द होने जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट पहले SIR पर क्या फैसला दे चुका है?

यह इस मामले का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में हुए SIR को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था।

Association for Democratic Reforms बनाम Election Commission of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR कराने की चुनाव आयोग की शक्ति को वैध माना था।

बिहार में SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश से शुरू हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि संविधान के अनुच्छेद 324 और Representation of the People Act, 1950 की धारा 21(3) के तहत चुनाव आयोग के पास इस तरह का विशेष पुनरीक्षण करने की शक्ति है।

फिर नई याचिका में अलग क्या है?

यही बात सबसे ज्यादा समझने की जरूरत है।

पुराने मामले में मुख्य सवाल था:

क्या चुनाव आयोग के पास SIR कराने की कानूनी शक्ति है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हां, चुनाव आयोग के पास यह शक्ति है।

लेकिन नई याचिका में एक अलग सवाल भी उठाया गया है:

SIR से जुड़े बाद के महत्वपूर्ण फैसले क्या तीन सदस्यीय चुनाव आयोग ने कानून के अनुसार मिलकर लिए थे?

यानी पुराना फैसला SIR कराने की शक्ति से जुड़ा था, जबकि नई याचिका में फैसले लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट अब क्या देख सकता है?

जब इस मामले की सुनवाई शुरू होगी, तो सबसे पहले अदालत यह देख सकती है कि याचिका में उठाए गए सवाल सुनवाई योग्य हैं या नहीं।

इसके बाद अदालत चुनाव आयोग या केंद्र सरकार से जवाब मांग सकती है।

जरूरत पड़ने पर अदालत संबंधित दस्तावेज भी मंगा सकती है।

इन दस्तावेजों से यह साफ हो सकता है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों ने मंजूरी दी थी या नहीं।

लेकिन अभी से यह कहना सही नहीं होगा कि:

ज्ञानेश कुमार को हटा दिया जाएगा, SIR रद्द हो जाएगा या याचिका निश्चित रूप से स्वीकार हो जाएगी।

इन सभी सवालों पर फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

आम नागरिक के लिए इस मामले का मतलब क्या है?

यह मामला केवल ज्ञानेश कुमार के पद का मामला नहीं है।

इसका बड़ा सवाल यह है कि देश की चुनाव व्यवस्था संभालने वाली संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग अपने महत्वपूर्ण फैसले किस प्रक्रिया से लेती है।

अगर आयोग में तीन सदस्य हैं, तो महत्वपूर्ण फैसले लेते समय कानून में तय प्रक्रिया का पालन होना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह ज्यादा स्पष्ट हो सकता है कि SIR से जुड़े विवादित फैसलों में इस प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी आरोप को सही घोषित नहीं किया है। अदालत ने अभी केवल मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की बात कही है।

आधिकारिक स्रोत

  1. भारत का सर्वोच्च न्यायालय — बिहार SIR पर 27 मई 2026 का फैसला
    https://api.sci.gov.in/supremecourt/2025/35785/35785_2025_1_1501_71617_Judgement_27-May-2026.pdf
  2. भारत निर्वाचन आयोग — वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त
    https://www.eci.gov.in/honble-commission
  3. चुनाव आयोग का Voters' Service Portal — SIR और Form 6
    https://voters.eci.gov.in/
  4. Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 — India Code
    https://upload.indiacode.nic.in/view-casepdf?id=AC_CEN_3_20_00080_A2023-49_1704690560714&type=act
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